Thursday, December 10, 2020

ज़िद्दी बुड्ढा

मेरी पत्नी मेरी परवाह नहीं करती, मेरी बेटी मेरी बात नहीं सुनती, बेटा प्राय: मुझसे नाराज़ रहता है। बहू द्वारा मेरा निरादर करना आम 
बात है, करीबी रिश्तेदार मुझसे दूर भागते जा रहे हैं संक्षेप यह कि किसी के पास मेरे लिए ना तो समय है ना आदर-सम्मान। मोदी सरकार की तरह हो गया हूं मैं, कोई मुझसे खुश ही नज़र नहीं आता। जिसको देखो वह धरना प्रदर्शन कर रहा है। दिन प्रतिदिन दयनीय होती मेरी हालत पर लोग हंसते और मज़ाक उड़ाते तो नज़र आते हैं पर समाधान के लिए बढ़ते हाथ नज़र नहीं आते, बहुत तनाव भरी परिस्थितियों से गुजर रहा हूं मैं आजकल।
मेरे एक बुजुर्ग मित्र ने जब मुझसे अपना यह दर्द बयान किया तो मैं भावुक हो गया जबकि मैं यह अच्छी तरह जानता हूं कि इस आधुनिक मशीनी युग में इस बुजुर्ग की यह अकेली कहानी नहीं है यह कहानी तो अब घर घर की कहानी बन चुकी है, पता नहीं इस युग के बच्चों को यह क्या हो गया है कि वे अपने बुजुर्गों का आदर-सत्कार करना ही भूल गए हैं। 
टूटते रिश्तों और दम तोड़ती मर्यादा को पुनः स्थापित करने में अपनी भूमिका तलाश करते हुए मैंने उस बुजुर्ग से एक बुद्धिजीवी की तरह समझाया कि आप शब्दों की शक्ति को भूल गए हैं इसलिए दुखी हैं आप भूल गए हैं कि शब्द तोप और तलवार से भी अधिक शक्तिशाली होते हैं यह जानते हुए भी आपने तोप और तलवार तो उठा ली है और उन शब्दों को भूल गए हैं जो जख्मों पर मरहम से ज्यादा तेज काम करते हैं। मेरी बात सुनकर बुजुर्ग ने मुझे शक भरी नजरों से घूरते हुए कहा-तुम कहना क्या चाहते हो ?
मैंने विश्वास भरे स्वर में कहा-दुनिया की समस्त समस्याओं का हल चंद शब्दों के जादू में छुपा है। शब्दों से जादू करना सीख लीजिए और फिर देखिए चमत्कार कि किस प्रकार आप से नफ़रत करने वाले भी आपके प्रिय बन जाते हैं।
बुजुर्ग ने शक भरी नज़रों से मेरी ओर देखा, जैसे मैं कोई पेशावर जादूगर हूं, जो अपने शब्दों के जादू से जल्द ही अपनी जेब से खरगोश निकालकर उसे दिखा कर अचंभित कर दुंगा।
बुजुर्ग को आश्चर्य से देखते हुए मैंने पूछा- इस प्रकार क्यों देख रहे हैं, बात को समझिए लोगों के दरमियान समन्वय बनाने के लिए संवाद की आवश्यकता होती है और संवाद शब्दों से संभव होता है। आंकड़ों या इतिहास के पन्नों से नहीं। आपकी हर समस्या का हल शब्दों के इस जादू में छुपा है जो मैं आपको बताने वाला हूं।
बुजुर्ग ने जिज्ञासा से पूछा-वह जादुई मंत्र क्या है, जो मुझे नहीं आता और आप मुझे बताने वाले हैं।
मैंने कहा वह बहुत सरल है। आपको केवल कुछ शब्द अपने परिजनों से इस प्रकार कहना हैं कि मैंने तुम्हारी हर वह गलती जो तुमने मेरे आत्मसम्मान को पहुंचाई है उसके लिए मैं तुमको क्षमा कर रहा हूं अब मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है, इन जादुई शब्दों के कहने के बाद आप कमाल देखिएगा कि किस प्रकार आपकी आत्मा पर आए सब घाव खुद-ब-खुद भर जाएंगे और आपके अपने आपको अपनी पलकों पर बिठाने के लिए विवश हो जाएंगे। आपको केवल अपने जादुई शब्दों पर पूरा उतरना पड़ेगा जो निस्वार्थ होंगे और याद रखना होगा कि किसी को क्षमा कर देना जीवन का वह मंत्र है जो जीवन को आशावादी व ऊर्जावान बना देता है। याद रखिए नाराज़गी का कारण दूसरे नहीं आप स्वयं होते हैं इसलिए पहल भी आपको स्वयं से ही करते हुऐ अपनी बहू, बेटी और पत्नी को उनकी गलतियों के लिए क्षमा करना होगा। इस प्रकार आप स्वयं को तनाव मुक्त कर पाएंगे। 
मेरे सकारात्मक सुझाव को बीच में रोकते हुए बुजुर्ग ने बड़ी हिकारत से मुझे देखा और अपनी सफेद दाढ़ी पर हाथ फेहराते हुए कहा- बातें बहुत अच्छी कर लेते हो परंतु वे स्वभाविक नहीं होती हैं, मैंने आश्चर्य से पूछा आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?
बुज़ुर्ग ने बड़ी सहजता के साथ कहा-मैं अपने परिजनों को अच्छी तरह जानता हूं आपका परामर्श मानकर अगर मैंने अपनी बहू बेटी और पत्नी से आपका बताया हुआ मंत्र कह भी दिया कि कोई बात नहीं मैंने तुम्हारी हर गलती के लिए तुमको क्षमा कर दिया है। अब मुझे तुम लोगों से कोई शिकायत नहीं है। सुख शांति बनाए रखो और आराम से रहो। जिसके उत्तर में उन्होंने पलटकर मुझसे यह कह दिया कि तुमसे क्षमा मांग कौन रहा है, ऐ- सटठियाए हुए बूढ़े और रही बात शिकायत की, तो वह हम सबको तुम से है, तुमको हमसे कोई शिकायत नहीं है, हम तो सामान्य तौर पर ही रह रहे हैं; परंतु तुमने अपने नए-नए नियमों व कानूनों से दुखी कर रखा है इसलिए हम तुमको माफ करने के बिल्कुल तैयार नहीं हैं। हमें तो सिर्फ तुमसे छुटकारा चाहिए।
इस परिस्थिति में आप अपने जादुई शब्दों को क्या नाम देंगे।
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शाहिद हसन शाहिद
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2 comments:

  1. 😆😆😆😆😆😆😆😆 bhut achi kahani hai

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  2. Reality of life scatched in few words by Janab Shahid Hasan sb. Prof. Hussain

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